May 17, 2008 7:36 pm
जय श्री
गुरुवे
नमःसोच
जिसने
तुम्हे
सुंदर
सृष्टि
दी , जो
किसी भी
प्रकार
से
स्वर्ग
से कम
नहीं है
,
आश्चर्
! वहां
नर्क (Hell)
भी है ।
क्यों ?
नर्क
हमारी
कृतियो
का
प्रतिफ
न है ।
हमारी
स्वार्
भरी
क्रिया
ं मैं
नर्क को
जन्म
दिया है
। हमने
अवांछि
कार्यो
के
द्वारा
अपने
लिए
अभिशाप
की
स्थिति
उत्पन्
की है ।
स्पष्ट
है कि
नर्क जब
हमारी
उपज है ,
तोइसे
मिटाना
भी हमें
ही
पड़ेगा ।
सुनो
कलियुग
में पाप
की
मात्रा
पुण्य
से अधिक
है जबकि
अन्य
युगों
में पाप
तो था
किंतु
सत्य
इतना
व्यापक
था कि
पापी भी
उत्तमत
ंगों को
आत्मसा
करने
की
स्थिति
में थे ।
अतः
नर्क
कलियुग
के पहले
केवल
विचार
रूप में
था , बीज
रूप में
था ।
कलियुग
में यह
वैचारि
नर्क
के
बीजों
को
अनुकूल
और
आदर्श
परिस्थ
तियां
आज के
मानव
में
प्रदान
कीं।
शनै :
शनैः
जैसे -
जैसे
पाप का
बोल-बाल
ोता
गया
,नर्क का
क्षेत्
विस्ता
ित होता
गया ।
देखो ।
आज धरती
पर क्या
हो रहा
है ?
आधुनिक
मनुष्य
ं
वैचारि
प्रदूष
की
मात्रा
में
वृद्धि
हुयी है
। हमारे
दूषित
विचार
से
उत्पन्
दूषित
ऊर्जा (
destructive energy )
, पाप -
वृत्ति
ों की
वृद्धि
एवं
इसके
फलस्वर
प आत्मा
के
संकुचन
द्वारा
उत्त्प
्न
संपीडन
से
अवमुक्
ऊर्जा ,
जो
निरंतर
शून्य
(space) में
जा रही
है , यही
ऊर्जा
नर्क का
सृजन कर
रही है ,
जिससे
हम
असहाय
होकर
स्वयं
भी झुलस
रहे हैं
और
दूसरो
को भी
झुलसा
रहे हें
। ज्ञान
की
अनुपस्
िति मैं
विज्ञा
के
प्रसार
से ,
सृष्टि
और
प्रकृत
की
बहुत
छति
मनुष्य
कर चुका
है ।
उससे
पहले की
प्रकृत
छति
पूर्ति
के लिए
उद्यत
हो जाए
हमें
अपने-
आपको
बदलना
होगा ।
उत्तम
कर्मों
के
द्वारा
आत्मा
के
संकुचन
को
रोकना
होगा ,
विचारो
में
पवित्र
ा का
समावेश
करना
होगा ।
आत्मा
की
उर्जा
जो
आत्मा
के
संपीडन
के
द्वारा
नष्ट
होकर
नर्क
विकसित
कर रही
है उसको
सही
दिशा
देने का
गुरुतर
कर्तव्
तुम्हा
े समक्ष
है ताकि
यह
ऊर्जा
विकास
मैं
सहयोगी
सिद्ध
हो सके ।
आत्मा
की
सृजनात
मक
ऊर्जा
को
जनहित
के लिए
प्रयोग
करो ।
कल्याण
का
मार्ग
प्रशस्
होगा ।
नर्क की
उष्मा
मद्धिम
पड़ेगी
और
व्याकु
सृष्टि
को
त्राण
हासिल
होगा ।
आत्म -
दर्शन
(स्वयं
का
ज्ञान )
और
आत्मा
के
प्रकाश
द्वारा
अपना
रास्ता
निर्धा
ित करना
होगा ।
आसान
नहीं है
यह सब
लेकिन
सृष्टि
ने क्या
तुम्हे
आसन
कार्यो
के लिए
सृजित
किया है
? सरीर
की जय के
साथ -
साथ
आत्मा
की
जयजयका
गुंजाय
ान करो
। सफलता
मिलेगी
।
सृष्टि
और
सृष्टि
कर्ता
सदैव
तुम्हा
े साथ
है ।
प्रकृत
का
आशीर्व
द
तुम्हा
े ऊपर
बरसेगा
।
*****************ज
य शरीर ।
जय
आत्मा ।
।
******************